Monday, February 19, 2018

Compensation in the case of custodial death

Case Details of File Number: 3116/4/26/2014-AD
Diary Number
Name of the Complainant

Name of the Victim

Place of Incident

Date of Incident
Direction issued by the Commission
These proceedings shall be read in continuation of earlier proceedings of the Commission dated 28.11.2017. The matter relates to death of undertrial prisoner Pundev V Choudhar son of late Ram Choudhary on 6.7.2014 due to inadequate treatment and medical negligence by the Jail Administration. The Commission had recommended an amount of Rs.1,00,000/- as interim relief to be paid to the next of kin of the deceased prisoner. In response, the Deputy Inspector General, Prison and Correctional Services, Bihar, Patna, vide communication dated 12.1.2018 has submitted the compliance report. Perusal of the same reveals that an amount of Rs.2,00,000/- as recommended by the Bihar Stae Human Rights Commission has been paid to Smt. Parvati Devi wife of the deceased prisoner on 11.8.2017. The delinquent prison personnel have also been dealt with and punished departmentally Proof of payment has also been annexed. The Commission has considered the matter. An amount of interim relief of Rs.2,00,000/- has been paid to wife of the deceased prisoner. Since the Bihar State Human Rights Commission is already seized of the matter, therefore the case is closed. Let a copy of these proceedings also be transmitted to the Bihar State Human Rights Commission, Deputy Director (M&C), NHRC and to the beneficiary for information. LINKED WITH MAIN FILE NO.2716/4/26/2014-JCD.
Action Taken
Concluded and No Further Action Required (Dated 2/16/2018 )
Status on 2/19/2018
The Case is Closed.

From: PVCHR Communication
Date: Mon, Jul 7, 2014 at 10:42 AM
Subject: Masaurhi jail inmate found dead
To: covdnhrc , jrlawnhrc
Cc: "Dr. Lenin Raghuvanshi"

The Chairperson
National Human Rights Commission
New Delhi

Dear Sir,

I want to bring in your kind attention towards the news published in Times of India on 7th July, 2014 regarding Masaurhi jail inmate found dead

PATNA: A 40-year-old inmate of Masaurhi subdivisional jail was found dead in his cell on Sunday morning. The wife of the diseased, Parvati Devi, and other relatives alleged that Purnadev Chaudhary succumbed to his injuries as he was brutally beaten by the police.

IG (prisons and correctional services) Prem Singh Meena said three doctors would do the postmortem at PMCH. "The postmortem has been videographed. The report is expected on Monday. Only then we can confirm the reason of the death," he said.

According to police sources, Purnadev of village Deoria under Bhagwanganj police station area in Patna district was arrested and sent to jail by Bhagwanganj police on July 2 for selling hooch. But his wife has complained to the prison department that he died because of police thrashing.

Meena said, "He did not wake up on Sunday morning. The jail doctor declared him dead. Some external marks of physical assault were visible, as told by the relatives and the jail superintendent. An FIR has been lodged with Masaurhi police station in this connection."

Patna SSP Manu Maharaaj said Parvati as well as the jail administration alleged in writing that ASI Sunil and SI Anil beat Purnadev badly during the last couple of days. However, Purnadev had been in judicial custody since July 2. The jail doctor declared him medically fit on July 3 and July 4, the SSP said.

Therefore it is kind request 

1.To conduct an inquiry in this incident of custodial death under section 176(1)A Cr.PC by a Judicial Magistrate
2. To provide compensation to the victim's family.
3.   To ensure Videography of the Post-Mortem Report of the victim&
the same is informed to NHRC.

Thanking You

Sincerely Yours

Rohit Kumar

Detention Watch Co-ordinator 

#PVCHR #u4humanrights #detention #NHRC #custodialdeath #prison

Saturday, February 17, 2018

“भारत में उभरते कॉर्पोरेट फासीवादी राज्य में यातना, स्व व्यथा चिकित्सा और न्याय पर पहुँच”

मानवाधिकार जननिगरानी समिति (PVCHR), इण्टरनेशनल रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑन टार्चर विक्टिम (IRCT), यूनाईटेड नेशन ट्रस्ट फण्ड फॉर टार्चर विक्टिम (UN Trust Fund For Torture Victim) और ओक फाउंडेशन (Oak Foundation) के संयुक्त तत्वाधान में एक सम्मलेन का आयोजन 15 फरवरी, 2018 लहुरावीर स्थित होटल कामेश हट में किया गया | यह सम्मलेन मुख्य रूप से भारत में उभरते कॉर्पोरेट फासीवादी राज्य में यातना, स्व व्यथा चिकित्सा और न्याय पर पहुँचविषयक पर आधारित था |
         सम्मलेन की शुरुआत करते हुए मानवाधिकार जननिगरानी समिति के सीईओ डा0 लेनिन रघुवंशी ने बताया कि कैसे हम आज इस सम्मलेन को रखने का मकसद यह है कि जो भी पीड़ित किसी भी प्रकार के हिंसा या यातना से गुजरता है उसे शारीरिक यातना के साथ ही साथ सबसे ज्यादा मानसिक यातना झेलना पड़ता है | जिसके बाद उसका व्यवहार पूरी तरह से परिवर्तित हो जाता है और वो पीड़ित व्यक्ति समाज की मुख्यधारा से कट कर
अपनी अलग ही भय व दुःख की दुनिया में जीने को मजबूर हो जाता है और फिर वह न्याय पाने की आस छोड़ देता है उसमे हमारी व्यवस्था का भी बड़ा योगदान होता है | लेकिन यदि सही समय पर उसकी पीड़ा को संयमित तरीके से सुना जाय तो इससे उसे बहुत सम्ब्बल मिलता है और वह न्याय पाने की प्रक्रिया में समाज की मुख्यधारा से पुनः जुड़ जाता है | आज इस सम्मलेन के माध्यम से हम ऐसे ही पीडितो को एक मंच पर लाकर उनकी स्व व्यथा कथा सुनने का प्रयास किया गया और उनके न्याय पाने हेतु पहल किया गया |   

         इस सम्मलेन में डा0 जेरमी रिंकर के पेपर “Narrative Reconciliation as Rights Based Peace”. पर चर्चा की गयी | इसके साथ ही इस सम्मलेन में उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मिर्ज़ापुर जिले से और झारखण्ड के कोडरमा से पीड़ित एकत्रित हुए, इस सम्मलेन में सभी पीडिती ने अपनी स्व व्यथा कथा को सभी के साथ साँझा किया |
         इस सम्मलेन के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डा0 राजेश मिश्रा ने कहा कि यातना विरोधी बिल को लॉ कमीशन की संतुति पर राज्य सभा में अविलम्ब पारित करना चाहिए | यातना पर संयुक्त राष्ट्र संघ कन्वेंशन (UN Convention against Torture) का अनुमोदन होना चाहिए | आगे उन्होंने कहा कि राज्य सभा की सलेक्ट कमेटी की शिफारिश, माननीय सर्वोच्च न्यायलय व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संतुतियो के बाद भी हीला हवाली कर रही है | इसका सबसे बड़ा कारण उत्तर प्रदेश से आप समझ सकते है कि कानून के राज की जगह इनकाउंटर का का राज स्थापित हो रहा है |
         इसी कड़ी में अन्य इलाको से आये पुलिस यातना और अन्य यातनाओ से पीडितो का सम्मान समारोह किया गया जिससे उन्हें गरिमामय जिन्दगी जीने में मदद मिल सके | वाराणसी के साहिल नट, छेदी बनवासी, शबिहा, शिराजुद्दीन, मेहताब आलम, सावित्री, अंजनी, शंकर यादव, एटा जिले के गजाधर और झारखण्ड के कोडरमा जिले की रीना को इस सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया | एटा जिले के गजाधर ऐसे पीड़ित है कि उन्हें बिना किसी जुर्म के 20 वर्षो तक बांग्लादेश की जेल में रहकर सजा काटनी पडी | कामन वेल्थ ह्युमन राईट्स इनिशिएटिव और मानवाधिकार जननिगरानी समिति ने पैरवी करने के बाद उसे बांग्लादेश की जेल से छुड़ाया और भारत में पुनः उसके पुनर्वासन के लिए पैरवी की |   
         इस सम्मलेन के दौरान ही लखनऊ के मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री आशीष अवस्थी को मानवाधिकार जननिगरानी द्वारा प्रतिष्ठित “जनमित्र सम्मान” देकर उन्हें सम्मानित किया गया |
         आगे इस सम्मलेन में किसानो के बीच जाति आधारित अंतर्विरोधों को न्याय के आधार पर काम करने एवं ‘जातिगत सामन्तवादी’ व ‘नव उदारवाद’ द्वारा किसानी पर किये जा रहे हमले व नुकसान के प्रतिरोध में प्रतीक के रूप में वाराणसी के श्री राज कुमार गुप्ता, श्री विनोद कुमार, श्री बबलू कुमार पटेल उर्फ़ बाबू, श्री सत्य नारायण पटेल, श्रीमती सुमन देवी और आजमगढ़ के श्री अमित निगम और कुमारी सविता को “नव दलित सम्मान” से सम्मानित किया गया |    
         इसके साथ ही ऐसे पीड़ित जो आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है उन्हें सब्बल देने के लिए कम्बल वितरित किया गया | वाराणसी के साधू, बादाम, अरविन्द, शिराजुद्दीन, शंकर यादव, पंचम यादव, पप्पू, राजकुमार, कैलाश, रेखा, सुखई, मिला, राम चन्दर, गुलाब, छेदी बनवासी, शबिहा, मेहताब, अंजनी, मिर्ज़ापुर जिले के त्रिभुवन, मुरहू, राजू, सीता, ब्रिजेश, पूजा, परदेशी, विदेशी और झारखण्ड के कोडरमा जिले की रीना को कम्बल वितरित किया गया |
         डा0 लेनिन रघुवंशी की दादी और शिरिन शबाना खान के भाई की मृत्यु पर 2 मिनट का मौन रखकर सम्मलेन का समापन किया गया |